जिंदगी फकीरों सी बन गयी है…

जिंदगी फकीरों सी बन गयी है


खुशहाल थे जब आटे-दाल के चक्कर में दिन ढल जाया करता था

इंटरनेट पे खाक छानते छानते, जिंदगी फकीरों सी बन गयी है

इसे मदद की तो उसे क्यों नहीं, इसने मदद की तो उसने क्यों नहीं

मददगारों की तस्वीर भी अब गुनाहगारों सी बन गयी है

ईद की मुबारकबाद दी तो करवाचौथ का चाँद नाराज हो गया

फितरत अब चांदतारों की भी इंसानों सी बन गयी है

दिवाली में खुशमिज़ाज और क्रिसमस में ऐटमबम बन गए यारों

पटाखों की पहचान भी अब गद्दारों सी बन गयी है

भाईचारा था, जबतक न मालूम था के कौम खतरे में है

अब रिश्तों की हालत भी दीवारों के दरारों की सी बन गयी है 

- © मानस (sondeshca@gmail.com) (९७६९३६२८१८)

PC: Aditya Sawant

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